Tag: पुरूषार्थ

पुरुषार्थ और फल

एक मिट्टी से ही चिलम भी बनती है तथा घड़ा भी, चिलम दूसरों को जलाती तथा खुद भी जलती, घड़ा खुद ठंडा तथा दूसरों को

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भाग्य/पुरूषार्थ

सर्दी ज्यादा होने पर गर्म ऊनी कपड़े भी ठंड़े लगते हैं, जैसे कोई काम नहीं कर रहे हों । पर ऊनी कपड़े हटाने पर पता

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पुरूषार्थ

उलझने से बचना, सुलझने का प्रयास करना, भुगतने की सामर्थ रखना । श्री लालमणी भाई

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मोह/पुरूषार्थ

मोह – घरवालों/प्रियजनों से, पुरूषार्थ – मोह कम करने का प्रयास । श्री लालमणी भाई

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भाग्य/पुरूषार्थ

इंतज़ार करने वालों को सिर्फ उतना ही मिलता है, जितना कोशिश करने वालों से बच जाता है । (श्री दीपक जैसवाल – ग्वालियर)

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भाग्य/पुरूषार्थ

पेन की स्याही भाग्य है, उसके द्वारा अच्छा/बुरा लिखा गया पुरूषार्थ है । चिंतन हमारी माँ…चिंतन

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पुरूषार्थ

मुर्गी भी एक एक दाने के लिये मिट्टी हटा हटा कर मेहनत करती है । (Mr. Henry Ford)

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नियति/पुरूषार्थ

प्रारंभ में पुरूषार्थ , अंत नियति पर । नियति पर depend करना है तो सांसारिक कार्यों में करो, धार्मिक कार्यों में पुरूषार्थ  ।

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पुरूषार्थ और अनुशासन

कैलेन्ड़र का महत्त्व पुरूषार्थी और अनुशासित व्यक्तियों के लिये है । बाकि सब तो दिन, महीनों और पूरे जीवन को बिना देखे ही गंवाते रहते

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मंगल आशीष

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