Tag: ड़ा. अमित

साथ

साँस के साथ, अकेला चल रहा था.. साँस गई, तो सब साथ चल रहे थे । (डॉ.अमित)

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परोपकार

एक दोस्त अपने दोस्त के शव को देख कर मुस्कराया ! तो एक बुज़ुर्ग ने कहा “बेटा ! जवान मौत पर मुस्कराते नहीं” ! लड़के

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धन / धर्म

व्यक्ति की चाल…… धन से भी बदलती है, और धर्म से भी ! जब धन संपन्न होता है, तब अकड़ कर चलता है; और जब

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चिंतन / चर्चा

जब अकेले हो तो परमात्मा से बात किया करो, और जब किसी के साथ हो तो परमात्मा की बात किया करो..! (डा.अमित )

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मोह

अपने बालों को और अपने वालों को उखाड़ कर फेंक देने वाला ही अपना कल्याण कर पाता है । (डा.अमित)

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मरण

जो सिर्फ़ अपने लिये जीता है उसका मरण होता है, और जो औरों के लिये जीता है उसका स्मरण । (डा.अमित)

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खुश

उदासियों की वजह तो बहुत हैं जिंदगी में, पर बेवजह खुश रहने का मजा ही कुछ और है । (डा.अमित राजा)

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पर उपदेश

बादल कितना पानी बरसाते हैं, पर छाता, बादलों की ज़गह अपने पर लगाते हैं। पापों से अपने को नहीं, दुनिया को बचाने में क्यों लगे

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फल

भिखारी भजन गाकर भीख माँग रहा था । सेठानी रोटी लेकर खडी रही पर रोटी दे नहीं रही थी । सेठ – रोटी दे क्यों

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भगवान

भगवान अगर मुझे वो तब नहीं देते जब मैं मांगता हूँ, तो फिर यकीनन वो मुझे तब देंगे जब मुझे इसकी जरूरत होगी । (डा. अमित)

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मंगल आशीष

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