Archive for June, 2010

Prayer

Pray Ordinarily to God,
He will do Extra Ordinary to you,

Be natural to God,
He will do supernatural for you,

Do Whatever possible for God,
He will do whatever impossible for you

(Mr. Mehul)

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ज्ञाता-द्रष्टा

एक किसान रोजाना अपनी पत्नी को पीटता था,
गुरू ने कहा – ज्ञाता द्रष्टा बन जाओ,
इस तरकीब से किसान पत्नी को पीट नहीं पाता था । किसान परेशान रहने लगा और एक दिन उसने तरकीब लगाई कि हल में एक बैल को तो एक तरफ़ से लगाया और दूसरे को दूसरी तरफ़ लगा कर खेत जोतने लगा ।
पत्नी ने देखा और ज्ञाता द्रष्टा का मंत्र याद कर कुछ नहीं बोली और किसान उसकी पिटाई नहीं कर पाया ।

यदि ज्ञाता द्रष्टा बने तो कर्म हमारी पिटाई नहीं कर पायेंगे ।

पं. रतनलाल जी इन्दौर

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क्षमा

शांत-स्वभावी की क्षमता बढ़ जाती है।

झगडे में शोर बहुत होता है, सुलह शान्ति से होती है ।

आत्मा का स्वभाव झुकना है, पर हम इंतजार करते हैं कि पहले सामने वाला झुके,
क्योंकि हमने अभिमान का जामा पहन रखा है।

मुनि श्री क्षमासागर जी

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ब्रम्ह्चर्य

पर के पास जितना जाओगे, आत्मा से उतने ही दूर हो जाओगे ।
शुक देव को 20 साल की अवस्था में वैराग्य हो गया ओर उन्होंने घर छोड़ दिया । उनके पीछे-पीछे उनके पिता उन्हें वापस लाने के लिये जा रहे थे। जब वे एक सरोवर के पास से निकले, उसमें नहाती हुयीं स्त्रीयों ने शुक देव के निकलने पर अपने वस्त्र ठीक नहीं किये, पर जब 80 वर्षीय पिता पास से निकले तब उन्होंने अपने शरीरों को ढ़कना शुरु कर दिया ।
पिता के पूछ्ने पर स्त्रीयों ने कहा- बात उम्र की नहीं है । यदि द्रष्टि सही हो तो कपड़े सम्हालने की जरुरत नहीं है ।

ब्रम्ह्चर्य, सिर्फ शरीरिक पवित्रता ही नहीं बल्कि द्रष्टि की निर्मलता का नाम है।

मुनि श्री क्षमासागर जी

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ज्ञान/मान

ज्ञान बंध का कारण नहीं, यदि मान आ जाये तो वह बंध का कारण है ।
जैसे दूध में यदि विष मिल जाये तो वह विष मरण का कारण है ।

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Destiny

Destiny is sometimes jewel and sometimes cruel.
When it is Jewel, wear it with your Humility,
When it is Cruel, bear it with all Ability.

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इन्द्रिय विजय

5 इन्द्रियाँ आपकी सेवक हैं, यदि आपने  उन्हें सिर पर रक्खा है तो आगे चलकर वे आपकी मालिक बन जायेंगीं ।
यदि उन्हें सेवक की ही तरह Treat किया तो वे बुढ़ापे तक आपकी सेवा करेंगी।

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संसार

एक मालिक रोज चुटकुला सुनाता था
और सब Employees जोर जोर से हंसते थे,
एक दिन एक Employee नहीं हंसा,
कारण बताया – मैं नौकरी छोड़ रहा हूँ ।

यदि संसार छोड़ना है तो किस किस के मुताबिक हंसे और किस किस के लिये रोयें ।

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संकल्प/विकल्प

संकल्प करें,
विकल्प ना रखें ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

( संकल्प में भी विकल्प ना करें । )

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भक्त

वक्त पर जो भक्त बनता है, वो विभक्त होता है ।

मुनि श्री योगसागर जी

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