कर्म बांधना चाहते हो या काटना ?
पर Action तो सारे बांधने के हैं !
सर्दी लगी – ऊनी कपड़े पहन लिये,
गर्मी लगी – कूलर चला लिया,
गाली दीं तो, 2 दे दीं,
भूख/प्यास लगी तो खाना खा लिया, पानी पी लिया ।
तो कर्म कटेंगे कैसे ? थोड़ा संयम/ सहनशक्ति तो पैदा करो ।
लक्ष्मी से गीता ने रुपये उधार लिये पर लौटाने के समय मन में बेईमानी आ गयी, पंचायत बैठी,
गीता ने लक्ष्मी से पूछा – जिस औरत को तुमने रुपये उधार दिये थे, वो किस रंग की साड़ी पहने हुये थी ?
लक्ष्मी – लाल रंग की साड़ी पहने हुये थी।
गीता ने पंचों से कहा कि मैं तो नीली साड़ी पहने हुये हूँ, कर्जा लाल साड़ी वाली महिला को चुकाना चाहिये।
हमने भी पर्याय बदल कर यह नया शरीर धारण कर लिया है, तो क्या पुराना कर्जा हमको नहीं लौटाना पड़ेगा ?
प्र.- राम भी तो हिरण के पीछे भागे थे, यदि हम जैसे साधारण आदमी भाग रहे हैं, तो इसमें बुराई क्या है ? उ.- राम सोने के हिरण के पीछे भागे जरूर थे, परन्तु अन्त में उस माया को मार दिया था/समाप्त कर दिया था।
और हम माया के पीछे भागते ही जा रहे हैं, अंतहीन, अंतिम दिन तक। यह फ़र्क है हम में और राम में।
प्रश्न : – मारीच आदिनाथ भगवान से नाराज़ था तो उनके समवसरण में क्यों जाता था ?
उत्तर :- यह देखने जाता था कि समवसरण में क्या-क्या है, ताकि जब मैं अपना समवसरण बनाऊंगा तो इससे भी अच्छा बना सकूं । इनके उपदेश में क्या-क्या कमियां हैं, जिनको बाहर जाकर मैं Highlight कर सकूं ।
श्री रतनलाल बैनाडा जी
क्या हम अपने गुरूओं के पास इस मन: स्थिति से तो नहीं जाते हैं !
Q. आत्मा दिखती नहीं है, कैसे विश्वास करें ?
A. दूध में मक्खन दिखता है?
पहले दूध को तपाओ (तप), ठंडा करो (कषायें शांत), जमाओ (स्थिरता), मथो (मनन), फिर मक्खन (आत्मा) साफ़ दिखने लगेगा।