Category: डायरी

विचार / विकार

विचारों की यदि दिशा भटक जाए तो वह विकार बन जाते हैं। एक बुढ़िया की कुटिया पड़ोसी ने हड़प ली। बुढ़िया ने निवेदन किया कि

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प्रचलित वस्तुएँ

कुम्हार अपने 5 गधों पर 5 सामग्रियाँ Overload करके रोज़ाना बेचने जाता था। अत्याचार –> राजा आदि के लिए। अहंकार –> सेठ आदि, नये धनपतियों

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दुर्जन

साँप को साँप कहो या साँप जी, वह तो डसेगा ही। क्रिस्टोफ़र नोलन

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मापदंड

राजा के प्रिय मंत्री की गलती पर राजा को सजा तो देनी ही थी। सैनापति की राय थी – 1 लाख मुद्रा 100 कोड़े, सैनिक

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साधु

काँपते हाथों को रोकने के लिये कहते हैं…. “साधो”। साधु वही जो विचलित होते मन को साध ले। ब्र. डॉ. नीलेश भैया

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रुलाना

रुलाना…. किसी को रुलाने का पाकीज़ा तरीका… हँसाओ इस क़दर कि पानी निकल आये, हम तो दुश्मन को भी पाकीज़ा सज़ा देते हैं। हाथ उठाते

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वाकपटुता

नया व्यक्ति गाँव में पहुँचा। पूछा –> यहाँ के लोग कैसे हैं ? मैं ही ईमानदार हूँ (पूरे गाँव के बारे में कथन हो गया)।

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विचार

अकेला कोई रहना नहीं चाहता। दो होते ही… तीन…चार। तालाब में पत्थर फेंकते ही एक, फिर अनेक लहरें उठ जाती हैं। ऐसे ही विचार एक

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नकल

एक विद्यार्थी दूसरे को पीट रहा था। कारण ? दूसरे ने गलत जबाब लिखा था, पहला उसकी नकल कर रहा था। नकल करनी हो तो

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सकारात्मक सोच

माली राजा को रोज़ाना फल लाकर देता था। राजा एक खाता/ रखता, दूसरा माली के ऊपर फेंकता। माली कहता “अच्छा हुआ”। पूछा, ऐसा क्यों कहता

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मंगल आशीष

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