Category: डायरी

मौन

शब्द तो यदा-कदा चुभते ही रहते हैं सबके, जब … मौन चुभ जाए किसी का तो सम्भल जाना चाहिए । (मंजू रानीवाला)

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चोरी

आर्यिका विशालमति, जो आर्यिका विज्ञानमति से ज्येष्ठ हैं, ने उनसे ब्रह्मचर्य पर कुछ लिखने को कहा। बड़ी माताजी की प्रेरणा और सलाह से उन्होंने ‘शीलमञ्जूषा’

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भक्ति

आचार्य श्री विद्यासागर जी (…,ऐसी प्रकृतियों का बंध होता है जो सारे बंधनों को काटने में समर्थ होती हैं।)

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पुरुषार्थहीन

जिनको लगता है कि उनके फैसले रब करेगा, वे बैठे हैं कि अब करेगा-अब करेगा। (ब्र. डॉ. नीलेश भैया)

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कृतघ्न

कृत = किया हुआ। हन = हंता/ विनाशक। कृतघ्न = जो किए गए उपकार को नकार दे। (कमल कांत)

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मंगल आशीष

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