Story

परनिंदा

एक राजा ने दो विद्वानों की खूब तारीफ़ सुनी उसने दौनों को अपने महल में बुलाया ।
एक विद्वान जब नहाने गया तो राजा ने दूसरे के बारे में पहले से उसकी राय पूंछी ।
पहला विद्वान – अरे ! ये विद्वान नहीं बैल है ।
ऐसे ही राजा ने दूसरे से पहले के बारे में राय जानी ।
दूसरा विद्वान – ये तो भैंस है ।

जब दौनों विद्वान खाना खाने बैठे तो थालियों में घास तथा भूसा देखकर चौंक पड़े ।
राजा ने कहा – आप दौनों ने ही एक दूसरे की पहचान बतायी थी, उसी के अनुसार दौनों को भोजन परोसा गया है ।
दौनों की गर्दन शर्म से झुक गयी ।

रत्नत्रय 2

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गुरूजन

एक चोर को सेठ ने रात को चोरी करते हुये देख लिया ।
अगले दिन एक दावत में सेठ पंगत में बैठा, पास में ही वह चोर भी बैठा था । सेठ को शक हो गया ।
सेठ बार – बार पूछता था – क्या रात को तू ही था ?
चोर सिर हिला कर मना करता रहा ।
मिष्ठान/पकवान परोसने वाले समझते कि इसे मिष्ठान/पकवान नहीं चाहिये और वे बिना परोसे आगे बढ़ते जाते ।

हम भी पूर्व के चोर हैं, मना करते रहते हैं और गुरूजन मिष्ठान/पकवान बिना परोसे आगे बढ़ जाते हैं ।

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ब्रम्ह्चर्य

पर के पास जितना जाओगे, आत्मा से उतने ही दूर हो जाओगे ।
शुक देव को 20 साल की अवस्था में वैराग्य हो गया ओर उन्होंने घर छोड़ दिया । उनके पीछे-पीछे उनके पिता उन्हें वापस लाने के लिये जा रहे थे। जब वे एक सरोवर के पास से निकले, उसमें नहाती हुयीं स्त्रीयों ने शुक देव के निकलने पर अपने वस्त्र ठीक नहीं किये, पर जब 80 वर्षीय पिता पास से निकले तब उन्होंने अपने शरीरों को ढ़कना शुरु कर दिया ।
पिता के पूछ्ने पर स्त्रीयों ने कहा- बात उम्र की नहीं है । यदि द्रष्टि सही हो तो कपड़े सम्हालने की जरुरत नहीं है ।

ब्रम्ह्चर्य, सिर्फ शरीरिक पवित्रता ही नहीं बल्कि द्रष्टि की निर्मलता का नाम है।

मुनि श्री क्षमासागर जी

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रूप का प्रभाव

सीता को रिझाने के लिये रावण के सारे प्रयास असफल होने पर मंत्रियों ने सलाह दी – आपको तो बहुरूपणी विद्या आती है, आप राम का रूप रखकर सीता को अपने महल में ले आओ ।
रावण – राम का रूप रखा था, पर जैसे ही मैं राम का रूप रखता हूँ, मेरे भाव ही बदल जाते हैं ।

( श्रीमति जया )

नकली रूप रखने से भावों में इतना परिवर्तन ! तो असली रूप वालों के कैसे भाव होते होंगे !

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पुरूषार्थ

साधु को जंगल में एक बूढ़ी लोमड़ी दिखाई दी, जिसके चारौ पैर नहीं थे, साधु परेशान – ये ज़िंदा कैसे है? खाती कैसे है? इतने में एक शेर आया, मुँह से खाना उगला, लोमड़ी ने खाना खाया, शेर चला गया।

साधु को उस नाचीज लोमड़ी के खाने और सुरक्षा के इंतजाम को देख, दैवीय शक्ति पर पूर्ण विश्वास हो गया। वह भी पास में ही नियम लेकर बैठ गया कि अब तो मेरे भोजन/सुरक्षा का इंतजाम देवता ही करेंगे। बहुत दिन निकल गये देव ने कुछ नहीं किया, साधू नाराज हो, देव को बुरा भला कहने लगा।

देव प्रकट हुये और पूछा नाराज क्यों हो रहे हो ?

साधु – तुम इस लोमड़ी के लिये तो सब इंतजाम करते हो पर सबसे श्रेष्ठ कृति, इस मनुष्य के लिये कुछ नहीं किया,  तीन दिन से भूखा बैठा हुआ हूँ।

देव बोले कि लोमड़ी से क्यों अपनी तुलना करते हो, तुमको तो हाथ, पैर, बुद्धि, सब मिला है, तुम तो शेर से भी श्रेष्ठ हो, अपना इंतजाम खुद कर सकते हो, शेर की तरह दूसरे निर्बलों का भी उपकार कर सकते हो, देव का मुँह क्यों ताकते हो !! पुरूषार्थ करो।

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उधारी

१ ठग सेठ को ठगने पहुँचा। वहाँ देखा कि सेठ तो किसी को भी पैसे उधार दे रहा है। उसने भी 1 लाख रू. उधार मांगे।
सेठ ने दे दिये और पूछा कि कब लौटाओगे?

अगले जन्म में।

सेठ ने बहीखाते में लिख लिया। ठग खुशी खुशी अपने गांव की ओर जाते समय एक जानवरों के तवेले में रूक गया। वहां दो बैल आपस में बात कर रहे थे।
पहले बैल ने कहा – आज मैंने किसान से पिछले जन्म के उधार लिये हुये 100 रू, दिन रात मेहनत करके चुका दिये, अब मैं मुक्त हूँ, अगले जन्म में अच्छी पर्याय पा कर सुख से रहूँगा।

दूसरा बैल दुःखी हो रहा था, क्योंकि उसने तो पिछले जन्म में  किसान से 1000 रू. उधार लिये थे, उसे तो अभी बहुत दिन किसान की सेवा करनी थी पर उसने कहा कि एक तरकीब है – यदि कोई मुझे किसान से 2000 रू. में खरीद ले तो किसान 1000 में तो दूसरा बैल खरीद लेगा और मेरा 1000 रूपया चुक जायेगा। खरीदने वाले को भी घाटा नहीं होगा, वह मुझे राजा के हाथी से लड़वाकर 1 लाख रू. ईनाम के जीत सकता है।

पहले बैल ने पूछा कि तू हाथी को हरायेगा कैसे?
दूसरे ने कहा कि उस हाथी पर मेरे पिछले जन्म के 5000 रू. उधार हैं, वो मुझसे  लड़ेगा नहीं।

यह सुनने के बाद, पहला बैल मर गया और ठग को विश्वास हो गया।

ठग ने किसान से बैल खरीद कर हाथी से लड़वाया और हाथी जैसे ही बैल के सामने आया, बैल ने उससे अपने उधार लिये हुये 5000 रू. मांगे और यह सुनकर हाथी पीछे  भाग गया  और ठग को 1 लाख रू. इनाम के मिल गये ।

रूपये लेकर ठग सेठ के पास लौटाने गया, पर सेठ ने लेने से इंकार कर दिया, क्योंकि उसके बहीखाते में पैसे लौटाने की तारीख अगले जन्म की थी । ठग के बहुत प्रार्थना करने के जबाब में सेठ ने बताया की वह तो व्यापारी है और Fix Deposit की तरह जितने अधिक समय के लिये पैसे उधार ( Invest ) देगा, उतना ही ज्यादा Rate of Interest  उसे मिलेगा ।

हतास ठग ने उन 1 लाख रूपयों से उस शहर में एक तालाब खुदवाया पर पानी किसी को नहीं लेने देता था, पूछने पर बोलता था की यह तालाब सेठ का है और उनकी आज्ञा के बिना कोई पानी नहीं ले सकता । लोग सेठ को लेकर उसके पास आये, तब ठग बोला की यह आपके पैसों का ही है यानि कि आपका ही तालाब है और पानी तब लेने दूंगा, जब आप मेरे को 1 लाख रूपये वापस मिलने की रसीद दे देगें, ताकी मुझे अगले जन्म में बैल आदि बनकर आपकी उधारी ना चुकानी पड़े । सेठ ने पावती दे दी ।

(श्री सौरभ)

क्या हमने मां, बाप, गुरू, समाज, धर्म और देश का कर्जा चुकाने के बारे में कभी सोचा है ?

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मृत्युभय

रामलीला में हनुमान का Role करने वाला बीमार हो गया |  Director जल्दी जल्दी में एक हलवाई को Dialogue रटाकर 200 रू. में मना लाया ।
रावण के भयानक रूप को देखकर, हनुमान रूपी हलवाई डर कर भाग खड़ा हुआ ।
Director के पूछ्ने पर वह बोला कि – Acting करने को तो मैं तैयार था, पर उस रावण को सामने देख सब Dialogue भूल गया ।

ज्ञान यदि आचरण के साथ पक्का नहीं किया तो, मृत्यु को सामने खड़ा देख  सारा ज्ञान भूल जाओगे ।

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धर्म प्रभावना

एक आदमी नरक से छुपता छिपाता खिसक कर स्वर्ग में पहुंच गया। स्वर्ग वालों ने पकड़ लिया और बहुत मारा।
निकलते समय बोला कि तुम्हारी इन्हीं हरकतों की वजह से कोई स्वर्ग में नहीं आना चाहता ।

(श्री धर्मेंद्र)

अच्छे लोगों को अपना चरित्र ऐसा प्रस्तुत करना चाहिये जिसे देख कर बुरे लोग भी प्रभावित हों ।

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आत्मघात

एक नाई लोगों की मालिश करते करते ऊब गया ओर दुःखी होकर कुंये में गिर कर अपनी जान दे दी ।
गिरने की आवाज सुन मेंढ़क के सरदार ने पता किया कि कौन गिरा,
और यह पता लगने पर कि नाई मरा है, उसने नाई को बुलवा कर अपनी मालिश शुरू करवा दी ।

श्री लालमणी भाई

कर्म कभी समाप्त नहीं होते, आत्मघात करने से भी नहीं, बढ़ ही जाते हैं ।

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