Posted by admin on November 30, 2011 at 11:56 am ·

प्रासुक जल :-

छानकर पानी में लौंग ड़ाल दें तो 6 घंटे तक पीने योग्य,
गर्म करलें तो 12 घंटे तक पीने योग्य,
उबाल लें तो 24 घंटे तक पीने योग्य ।

Posted by admin on November 24, 2011 at 10:29 am ·

श्री शांतिनाथ भगवान :-

कामदेव : सुंदर शरीर – थोड़े समय का आकर्षण
चक्रवर्ती : वैभव – थोड़े समय का आकर्षण
तीर्थंकर : धर्म – स्थायी आकर्षण

मोह के चक्र को समाप्त कर सिद्धचक्र प्राप्त किया ।

मुनि श्री सौरभसागर जी

Posted by admin on November 22, 2011 at 11:15 am ·

कर्म काटना :-

पार्श्वनाथ भगवान के उपसर्ग में पत्थर आदि उन्हें लग नहीं रहे थे क्योंकि तीर्थंकरों के शारीरिक उपसर्ग नहीं होते हैं, तो कर्म कैसे कटे ?

कर्म तो ध्यान से कटे थे ।

पं. रतनलाल बैनाड़ा जी

Posted by admin on November 18, 2011 at 11:07 am ·

अनित्य :-

मृत्यु अमर जहाँ,
कौन रहेगा अमर वहाँ ।

मुनि श्री योगसागर जी

Posted by admin on November 15, 2011 at 11:07 am ·

अनेकांत :-

जैन दर्शन, छ्हों दर्शनों को सम्मलित करने वाला है, साम्यभाव से, निस्पक्ष हो जज की तरह निर्णय लेता है ।
एकांकी होकर न्याय हो ही नहीं सकता ।

Posted by admin on November 11, 2011 at 11:24 am ·

Navkar Mantra is like a software –
It enter your life,
Scan your problems,
Edit your Tensions,
Download your Solutions,
Delete your Worries,
And Saves You.

(Mr. Sanjay)

Posted by admin on November 04, 2011 at 11:33 am ·

संयास :-

संयास, दु:खों की अति से भी होता है,
और सुखों की अति से भी  ।

सुखों की अति वाले प्राय: योग की अति तक जाते हैं ,

वस्तु अधिक होने पर मन ऊबने लगता है ।

Posted by admin on November 03, 2011 at 10:51 am ·

तप :-

संकल्प-पूर्वक, विकल्प-रहित, रहना ही तप है ।

श्री कल्पेश भाई

Posted by admin on November 01, 2011 at 12:39 pm ·

मनुष्य गति दुर्लभ :-

देवों की संख्या मनुष्यों से असंख्यात  गुणी है ,
यानि असंख्यात बार देव बनने के बाद मनुष्य पर्याय मिलती है ।

पं जवाहरलाल जी भिंड़र

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