Archive for May, 2010

मृत्यु-भय

मृत्यु-भय  किनको लगता है ?

श्रीमति शर्मा

  1. मृत्यु-भय  उनको होता है, जिन्हें कर्म-सिद्धांत पर और अपने कर्मों की अच्छाई पर भरोसा नहीं हो ।
  2. यदि आपका तबादला पदोन्नति पर हुआ हो, तो आप खुशी खुशी जायेंगे या नहीं ?

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मान

बकरी तो मैं-मैं करै, अपनौ मूड़ कटाऐ ।
मैना तो मै-ना कहै, दूध भात नित खाये ।।

श्री लालमणी भाई

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मोक्ष मार्ग

कृषि, घास (संसार का वैभव) पैदा करने के लिये नहीं की जाती, घास तो Main फसल (मोक्ष मार्ग साधना) के साथ स्वतः ही प्राप्त हो जाती है ।

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Aim/Effort

Life without an AIM is like a Envelop without an address,
A life with AIM, but no EFFORT to achieve is like a Envelop with address but not posted.

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अनुकम्पा

हमारे अंदर अनुकम्पा कितनी प्रतिशत है ?

पूरे दिन में जितने प्रतिशत समय, हम चींटी/कीटाणुओं को देखकर चलते हैं,
उतनी प्रतिशत अनुकम्पा हमारे अंदर है ।

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Happiness/Angriness

Never Make any promise when you are Happy,
and never take any decision when you are Angry.

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स्वभाव

अपना घर छोड़ना बडा़ मुश्किल काम है,  अपना स्वभाव छोड़ना और भी  मुश्किल,  पर असम्भव नहीं |

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ज्ञान

गाय को यदि खूंटे से बांध कर नहीं रखा तो वह भटक जाती है ।
ज्ञान को भी यदि श्रद्धा के खूंटे से बांध कर नहीं रखा तो वह भी भटक जायेगा ।

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धर्मध्यान का फल

सन् 1994 में गुरू श्री के प्रथम दर्शन करके गुना से लौट रहे थे । श्री जैसवाल ने अपने Managing Director श्री आई. महादेवन के बारे में बताया – “ये पक्के ईमानदार व्यक्ति हैं, इसलिये ऊपर से लेकर नीचे तक सब इनके Department वाले, इनके खिलाफ हैं और इनको बहुत तंग किया करते हैं । दूसरी बात यह है कि ये सुबह 2 घंटे भगवान की पूजा पाठ करते हैं”।

रास्ते में उनसे पूछा – आप रोजाना 2 घंटे धर्मध्यान करते हैं, उसके Return में आपको क्या मिला ?

श्री महादेवन ने ज़बाब दिया – “Material world में कुछ नहीं मिला, पर जब भी मेरे जीवन में दिक्कत आती है, तब मेरा यही धर्मध्यान मुझे सम्बल देता है, इसी के सहारे मैं सबको Face कर पा रहा हूँ” ।

श्री के. के. जैसवाल

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मोक्ष/संसार

श्रीमती शकुंतला जी की आर्यिका दीक्षा सोनागिर जी में 23 मई 2010 को संपन्न होनी थी । Programm पता करने के लिये, उनके पुत्र श्री पंकज को  Phone किया । श्री पंकज के दो नं. मेरे Mobile की Memory में  Save थे – पहला ‘Shop’ का, जिसके लिये पंकज के नाम के आगे ‘S’ लगाया गया था, दूसरा नं. ‘Mobile’ का था जिसे नाम के साथ ‘M’ लगाकर Save किया गया था ।
Dial करते समय आंखों पर चश्मा नहीं लगाया था, इस वजह से ‘Mobile’ की जगह ‘Shop’ वाला नं. Dial हो गया । गलती पता लगने पर दूसरा नं. Mobile वाला लगाया ।
मैंने पंकज  से बोला -

दृष्टि सही नहीं हो तो, Dial करो ‘M’ For ‘मोक्ष’ – Call चली जाती है ‘S’ For ‘संसार’ को  ।

Archived under संस्मरण – अन्य, चिंतन Comments (1)

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