Archive for January, 2010

संत

जो शांति से जिये वो संत ।

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द्रढ़ता

आयुष जैन (गुना ) 12 साल के बच्चे ने अपनी मां से आचार्य श्री के श्री मुख से सुना कि एक शराबी हर समय शराब पीता था, उसे कहा गया कि कमरे के एक कोने से दूसरे कोने में जाओ तब शराब ना पीने का नियम ले लो । उसने नियम ले लिया, कमरे में एक कोने से दूसरे कोने में जाते समय छत गिर गई और वो मर गया, लेकिन मृत्यु के बाद देव बना, क्योंकि वह त्यागी मरा था ।
आयुष को भी Thalassemia बीमारी हो गयी | जब हालत बहुत बिगड़ने लगी और उसे इन्दौर Ambulance से ले जाने लगे, रास्ते में उसे घबराहट हुई उसके पिता ने कुछ खाने और दवा लेने का आग्रह किया तब आयुष ने कहा कि मैं तो नियम लेके चला हूँ कि जब तक इन्दौर नहीं पहुंच जाऊंगा, तब तक मेरा अन्न, जल और दवा का त्याग है।
आज आयुष अपना नियम द्रढ़ता से निभाते हुये प्राण त्याग कर, देवलोक को सिधार गये हैं ।

छोटे-छोटे नियमों को द्रढ़ता से पालने वाले देवगति ही पाते हैं ।

मनीषा बुआ

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धर्म-पुरूषार्थ

शुभ सरस्वती है तथा लाभ लक्ष्मी है ।
पर हम सब लाभ ही लाभ के पीछे लगे रहते हैं ।
शुभ बढ़ा लो ( अपने पुरूषार्थ को धर्म में लगाकर ) और लाभ कम कर लो ( दान से ) तो जीवन में शुभ के साथ लाभ भी ज्यादा हो जायेगा ।
जैसे पंगत में मना करने पर और-और मिलता है ।

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दिगम्बरत्व

मुसलमान समुदाय के अब्दुल कासिम गिलानी और समंद आदि औरंगजेब बादशाह के समय दो फ़कीर हुये जिन्होंने दिगम्बरत्व को अपनाया ।
बादशाह के पूछ्ने पर कि आप नग्न क्यों रहते हैं ?
उन्होंने जबाब दिया कि लिबास वो पहनते हैं जिनमें ऐब होते हैं और जिसने तुझे ये बादशाहत दी है उसी ने हमें ये लिबास दिया है, हम उसके दिये हुये लिबास को कैसे छोड़ दें ?

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नग्नता

कलकत्ता की तरफ विहार करते समय एक पुलिस एस. पी. साथ में चल रहे थे ।
उन्होंने गुरू श्री से पूछा – नग्नता से क्या संदेश मिलता है ?

गुरू श्री – कम से कम में काम चलायें, जो बचे वो दूसरों के काम आये, यह नग्नता का अर्थ-शास्त्र है ।

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प्रतिस्पर्धा

प्रश्न : – मारीच आदिनाथ भगवान से नाराज़ था तो उनके समवसरण में क्यों जाता था ?
उत्तर :- यह देखने जाता था कि समवसरण में क्या-क्या है, ताकि जब मैं अपना समवसरण बनाऊंगा तो इससे भी अच्छा बना सकूं । इनके उपदेश में क्या-क्या कमियां हैं, जिनको बाहर जाकर मैं Highlight कर सकूं ।

श्री रतनलाल बैनाडा जी

क्या हम  अपने गुरूओं के पास इस मन: स्थिति से तो नहीं जाते हैं !

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धर्म

धर्म तो Homeopathic दवा है।
जो आपकी बीमारियों ( कमज़ोरियों) को पहले दिखाती ( उभारता ) है, फिर ठीक करती है ।

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पुरूषार्थ

पुरूष ( आत्मा ) के द्वारा किया गया कार्य, जिसका अर्थ व्यर्थ ना हो ।

श्री लालमणी भाई

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Self Realization

मैं पहले Railway में Deputy था, फिर गुरू का Deputy बना, अब अपना Deputy बनने की प्रक्रिया में हूँ और Final Goal  अपना ही Chief बनने का है।

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धर्म

गन्ने के ऊपर  और नीचे का भाग चूसने योग्य नहीं होता है ( बचपन और बुढ़ापा ), पर यदि उसे  खेत ( धर्म ) में रौंप दें तो गन्ने की फसल ( जीवन में मिठास )  उपज आती है ।

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