Posted by admin on November 30, 2009 at 10:51 am
विहार करते समय आचार्य श्री ने कहा -यदि पट्टी (सड़क पर खींची सफेद पेंट की लाईन) पर चलोगे तो पट्टी नहीं बंधेगी (पैरों पर) ।
( सड़क के बीच में कांटे भी नहीं होते हैं और पेंट की वजह से वहां सड़क Smooth तथा गर्मीयों में गर्म भी कम होती है । )
Archived under संस्मरण-आचार्य श्री विद्यासागर
Posted by admin on November 29, 2009 at 11:44 pm
कुछ बच्चे School ( धर्म ) में घंटी पर ओले की आवाज ( बहाना ) सुनकर Class से भाग खड़े होते हैं ।
बाहर ( संसार ) के ओले ( दुख ) खाने को तैयार हैं, उसमें राजी हैं ।
Archived under चिंतन
Posted by admin on November 28, 2009 at 7:06 am
जिव्हा 4 अंगुल की होती है । पर 32 सिपाहियों (दातों) के पकड़ में भी नहीं आती है, हाथ से भी Slip हो जाती है, और तो और दूसरे 32 सिपाही ( नकली दांत ) भी लगालो तो भी पकड़ में नहीं आती है, ना कभी बूढ़ी होती है, हमेशा लाल और रसदार होती है । भोजन करते समय पेट तो इशारा देता है, पर जिव्हा मानती ही नहीं, जिव्हा की शल्य चिकित्सा भी नहीं होती, पर इसकी वजह से पेट की करानी पड़ती है ।
हम ईमानदार होते हुये भी इस क्षेत्र में बड़े बेईमान हैं । ( इससे बहुत सावधान रहना )
Archived under डायरी
Posted by admin on November 27, 2009 at 8:21 am
क्या आप सुबह सुबह दुसरे का घर साफ करने जाते हो ?
यदि नहीं तो दुसरे के सुधारने में क्यों लगे रहते हो ।
श्री लालमणी भाई
Archived under डायरी
Posted by admin on November 26, 2009 at 11:04 pm
पैरों में कांटे गढ़े, आंखो में फ़ूल, आंखे चली क्यों ?
( पैर में कांटे तभी लगते हैं जब आंखे बाहर की सुंदरता से आकर्षित हो असावधान हो जातीं हैं। )
असावधानी से अच्छे काम का Result भी अच्छा नहीं होता है ।
Archived under वचनामृत-आचार्य श्री विद्यासागर
Posted by admin on November 25, 2009 at 3:12 am
Q. – हर जगह भगवान हैं तो मंदिर की क्या जरुरत है ?
A. – हर जगह हवा है तो पंखे की क्या जरुरत है !
(श्री धर्मेंद्र)
Archived under प्रश्न-उत्तर
Posted by admin on November 24, 2009 at 1:54 am
अंधे को खीर खाने दी ।
अंधे ने पूछा – खीर कैसी होती है ?
सफ़ेद ।
सफ़ेद कैसा होता है ?
बगुले जैसा ।
बगुले की गर्दन तो टेड़ी होती है, गले में फ़ंस जायेगी, मैं खीर नहीं खाऊंगा!
कुछ लोग, धर्म के क्षेत्र में इसीलिये नहीं आते क्योंकि शायद वे अंधे हैं, कहीं धर्म उनके गले में अटक ना जाये ।
श्री लालमणी भाई
Archived under डायरी
Posted by admin on November 23, 2009 at 2:49 am
गुलाब की तरह सुंदर और खुशबूदार बनना चाहते हो ?
- तो कांटों के साथ रहना सीख लो !
(श्री मिहुल)
Archived under डायरी
Posted by admin on November 22, 2009 at 5:45 am
S. L. भाई ने आचार्य श्री से पूछा कि अमेरिका के राष्ट्रपति ओबामा इतनी छोटी परिस्थितियों से उठ कर इतनी बड़ी जगह कैसे पहुंच गये ?
आचार्य श्री – सुना है वो गले में किसी हिन्दु भगवान की फ़ोटो लटकाते हैं, इसका मतलब अहिंसा में विश्वास रखते हैं, यह भी अपने आप में एक बड़ा कारण हो सकता है।
वैसे कर्म प्रक्रिया बड़ी जटिल है इसे समझना कठिन है।
Archived under संस्मरण-आचार्य श्री विद्यासागर
Posted by admin on November 21, 2009 at 9:12 am
साता में भी और-और की हाय में लगे रहना,
क्या सोने में सुगंध ढूंढने की कोशिश नहीं है ?
श्री लालमणी भाई
Archived under डायरी