ज़बाब
जो दूसरे को ज़बाब नहीं देता.
वह लाज़बाब है ।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
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जो दूसरे को ज़बाब नहीं देता.
वह लाज़बाब है ।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
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यदि विद्या पूर्ण रूप से हासिल नहीं की, तो काम नहीं चलेगा ।
जैसे अभिमन्यु अधूरी विद्या और छल से मारा गया ।
सावधान मोह भी हमें छल रहा है ।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
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कर्म सिद्धांत भी महामंत्र है |
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संकल्प करें,
विकल्प ना रखें ।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
( संकल्प में भी विकल्प ना करें । )
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आत्मा की आराधना छोड़ना अपराध है,
अपराध तभी होते हैं जब पंचेन्द्रियों के विषयों में लिप्तता अधिक हो जाती है ।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
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भगवान कभी आज्ञा नहीं देते, वे सिर्फ बताते हैं । इसमें आज्ञा भंग होने का ड़र भी नहीं रहता ।
आज्ञा देना आसान है, मनवाना बहुत कठिन, मांगना बहुत सरल है ।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
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कृषि, घास (संसार का वैभव) पैदा करने के लिये नहीं की जाती, घास तो Main फसल (मोक्ष मार्ग साधना) के साथ स्वतः ही प्राप्त हो जाती है ।
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( संसार के साथ साथ ) धर्म को भी बसाओ, बिसारो मत वरना अपने आप को पहचान नहीं पाओगे ।
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हवा ( गुरू ) के झोंके से भूसा ( विकार ) उड़ जाता है ।
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ज्ञायक बन गायक नहीं, पाना है विश्राम।
लायक बन नायक नहीं, जाना है शिवधाम।।
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