Posted by admin on May 5, 2010 at 12:38 am
गुरू श्री के पास एक सज्जन आये और पैर छूने लगे ।
गुरू श्री – यदि तुम लड़के हो तो पैर छूलो, यदि लड़की हो तो मत छूना ।
(क्योंकि उनके पहनावे से यह पता नहीं लग रहा था कि वह लड़के थे कि लड़की )
श्री विमल चौधरी
Archived under संस्मरण - मुनि श्री क्षमासागर
Posted by admin on January 27, 2010 at 4:19 pm
कलकत्ता की तरफ विहार करते समय एक पुलिस एस. पी. साथ में चल रहे थे ।
उन्होंने गुरू श्री से पूछा – नग्नता से क्या संदेश मिलता है ?
गुरू श्री – कम से कम में काम चलायें, जो बचे वो दूसरों के काम आये, यह नग्नता का अर्थ-शास्त्र है ।
Archived under संस्मरण - मुनि श्री क्षमासागर
Posted by admin on January 20, 2010 at 11:33 am
खुरई में गुरू श्री से किसी ने पूछा कि क्या कुर्सी पर बैठकर जाप दे सकते हैं ?
गुरू श्री – यदि पालती लगाने में विकलता होती है, तो जाप ना देने से अच्छा है कि कुर्सी पर बैठकर जाप करें ।
श्री विमल चौधरी
Archived under संस्मरण - मुनि श्री क्षमासागर
Posted by admin on December 18, 2009 at 9:18 am
झांसी में एक 85 वर्ष के बुज़ुर्ग ने इच्छा ज़ाहिर की, कि कंदमूल का त्याग करना है ।
गुरू श्री – गाजर खाते हो ?
बुज़ुर्ग ने कहा – हां आँख कमजोर है, इसलिये खाता हूं ।
गुरू श्री – गाजर के अलावा बाकी कंदमूल का त्याग कर दो ।
श्री विमल चौधरी
Archived under संस्मरण - मुनि श्री क्षमासागर
Posted by admin on December 9, 2009 at 12:58 am
ग्वालियर में गुरू श्री से किसी ने पूछा कि जब सब मुनि बन जायेंगे तो चौका कौन लगायेगा ?
गुरू श्री ने कहा कि औरों का तो पता नहीं पर तुम जरूर लगाओगे ।
(श्री धर्मेंद्र)
Archived under संस्मरण - मुनि श्री क्षमासागर