मोक्षमार्ग
समता की साधना और चारित्र की पवित्रता ही मोक्षमार्ग को प्रशस्त करती है ।
गुरु मुनि श्री क्षमासागर जी
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समता की साधना और चारित्र की पवित्रता ही मोक्षमार्ग को प्रशस्त करती है ।
गुरु मुनि श्री क्षमासागर जी
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मुर्गी भी एक एक दाने के लिये मिट्टी हटा हटा कर मेहनत करती है ।
(Mr. Henry Ford)
सबसे बड़ा ऐब संकोच है,
यही हमारे कल्याण में बाधक है ।
यह आता है, इस भाव से कि – हम सबको प्रसन्न रखें ।
पर हम भूल जाते हैं कि – ना हम किसी को प्रसन्न रख सकते, ना नाराज़,
सब अपने अपने कर्मोदय से सुखी-दुखी होते हैं ।
क्षु. श्री गणेशप्रसाद जी वर्णी
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An enemy occupies more space in the Brain,
Than a Well-Wisher in the Heart.
Don’t damage your Brain, Improve the Heart !
(Dr. Sudheer)
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एक कदम चलने वाला भी हजारों मील चल लेता है, कहीं से चलें तो सही ( प्रारंभ तो करें ) |
आचार्य श्री विद्यासागर जी
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मोह अपनों से कम करें,
निर्मोह दूसरों से कम करें,
अंत में मोह और निर्मोह दोनों को समाप्त करें ।
चिंतन
जो हरि का हुआ वो जौहरी बना,
जो संसार का हुआ वो पंसारी बना ।
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बाहर के झगड़े एक अवतारी होते हैं, लेकिन भीतर के बहुत जन्मों तक चलते हैं ।
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A man can’t be perfect, but a team can be perfect.
(Mr. Gaurav)
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पतंग को इतनी ढ़ील मत दो कि वह बहुत दूर चली जाये,
वापस आने में बहुत देर हो जाये,
या अटक जाये/टूट जाये,
और कभी वापस न आ पाये!
चिंतन
चमत्कार को नमस्कार नहीं,
पर नमस्कार (समर्पण) करने के बाद चमत्कार होने लगते हैं ।
आर्यिका श्री पूर्णमति माताजी
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मोह पुण्य को पाप में परिवर्तित कर देता है ।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
(पुण्य से जो पुत्र आदि मिले हैं, उनसे मोह करके पाप ही तो अर्जित कर रहे हो !)
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आग जले, धुंआ न उठे;
पानी बरसे , कीचड़ न हो;
कर्म करें मगर अहं से न भरें ।
आचार्य श्री पुष्पदंतसागर जी
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घड़ी टिक-टिक करके हर क्षण यह याद दिलाती है कि टिक (जीवन में स्थिरता ला) |
आर्यिका श्री पूर्णमति माताजी
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