आशीष

शीश की सार्थकता तो गुरूजनों से आशीष लेने में ही है ।

आर्यिका सौभाग्यमति माताजी

Archived under वचनामृत - अन्य Comments

सांसारिक सुख

कुत्तों के पास से कार गुजरते ही वो उसके पीछे दौड़ने लगते हैं और भौंकते हैं ।
क्या सोचते होंगे वे कुत्ते ?
गाड़ी को रोक कर उसके मालिक बन जायेंगे ?
गाड़ी को चलायेंगे ?

नहीं वो तो सिर्फ पीछा करते हैं, ना कभी मालिक बनेंगे और ना वो गाड़ी कभी उन्हें सुख दे पायेगी ।

( Dr P. N. Jain)

सांसारिक सुख भी ऐसा ही है, पूरी दम लगा कर हम उसके पीछे दौड़ रहे हैं, ना वह कभी हमारे हाथ आयेगा और ना ही हम को सुख शांति दे पायेगा ।

Archived under डायरी Comments

गणतंत्र दिवस

स्वतंत्रता, विदेशियों से मुक्ति पाने में,
पूर्ण स्वतंत्रता, आंतरिक कमजोरियों से मुक्ति पाने में ।

विदेशियों से घ्रणा करके उनको दूर कर दिया,
पर देश से प्रेम करना नहीं सीख पाये ।

Archived under डायरी Comments (1)

दया/याद

‘दया’ का उल्टा ‘याद’ है,
याद रखने रखने के लिये, बच्चों का नाम ‘दया’ रख लें ।

आर्यिका श्री सौभाग्यमति माताजी

Archived under वचनामृत - अन्य Comments

योग

योग यानि जोड़,

किसका ?

शरीर और आत्मा का,
जब भी ये दोनों मिलेंगे, योग होगा, कर्म बंधेंगे चाहे वे भगवान ही क्यों न हों ।

चिन्तन-श्री लालमणी भाई

Archived under डायरी Comments (2)

Love/Hate

I don’t have time to hate people, who hate me.
Because I am too busy in loving people, who love me.

(Smt. Shuchi)

Archived under डायरी Comments

अभिमान

अपनी बुलंदियों पर इतना नाज़ न करो,
हमने तो सितारों को टूटते हुए देखा है ।

Archived under डायरी Comments (1)

भाई

रावण राम से क्यों हारा जबकि उसके पास बेहतर सेना थी ?

राम के पास लक्ष्मण जैसा भाई था, पर रावण के पास विभीषण ।

Archived under डायरी Comments (4)

Guidance

True guidance is like a small lamp in a dark forest.
It does not show everything at once.
But it gives enough light for the next step to be safe.

Archived under डायरी Comments (3)

दु:ख/सुख

ममता दु:ख का कारण है,
समता सुख का कारण।

Archived under डायरी Comments (1)

प्रोत्साहन

जब हम दूसरों को आगे बढ़ाते हैं, तो खुद भी आगे बढ़ जाते हैं।

(श्रीमति शशी)

Archived under डायरी Comments

Gentleman

स्वामी विवेकानंद जी के प्रसिद्ध अमेरिका भ्रमण के दौरान, किसी अमेरिकन ने उनकी धोती दुपट्टे वाली वेषभूषा देखकर comment किया - “He does not appear to be a gentleman.”

स्वामी विवेकानंद - “Oh! In this country gentlemen are made by Tailors ?
In our country gentlemen are made by character.”

(Dr. P. N. Jain)

Archived under डायरी Comments (1)

परीक्षा

परीक्षा तो खुद ही देनी होगी, चाहे परीक्षा देते देते पसीना क्यों ना आ जाये ।
परीक्षा में सफ़लता पाने पर कुलपति/राष्ट्रपति आपको सम्मानित करने आ जायेंगे ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

Archived under वचनामृत-आचार्य श्री विद्यासागर Comments (2)

विज्ञान और धर्म

विज्ञान में ज्ञान पहले, विश्वास बाद में होता है,
जबकि धर्म में विश्वास पहले, ज्ञान बाद में आता है ।

(श्री गौरव)

Archived under डायरी Comments (2)

स्वभाव

कुछ ना हो तो अभाव सताता है,
थोड़ा हो तो भाव सताता है ।

जीवन का यही कड़ुवा सच है कि,
जब सब होता है तो स्वभाव सताता है ।

(श्री धर्मेन्द्र)

Archived under डायरी Comments (4)

« Previous entriesNext Page »Next Page »